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बंदिशों के बीच शिक्षा का उजास

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                   बंदिशों के बीच शिक्षा का उजास स्त्री शिक्षा केवल किसी एक व्यक्ति, परिवार या समुदाय का प्रश्न नहीं है, बल्कि सभ्यता के विकास, सामाजिक न्याय और मानवीय प्रगति का आधार है। किसी भी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहाँ महिलाओं को शिक्षा, अभिव्यक्ति और आत्मनिर्णय के कितने अवसर उपलब्ध हैं। शिक्षा स्त्री को केवल अक्षरज्ञान नहीं देती, बल्कि अपने अस्तित्व को समझने, प्रश्न करने, निर्णय लेने और समाज में सक्रिय भागीदारी निभाने की क्षमता भी प्रदान करती है। यही कारण है कि इतिहास के प्रत्येक परिवर्तनकारी दौर में स्त्री शिक्षा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिर भी यह विडम्बना रही है कि लंबे समय तक दुनिया के अधिकांश समाजों में महिलाओं की शिक्षा को सीमित करने का प्रयास किया गया। परंपराएँ, सामाजिक रूढ़ियाँ, आर्थिक परिस्थितियाँ और लैंगिक पूर्वाग्रह उनके मार्ग में बाधा बनते रहे। इसके बावजूद अनगिनत स्त्रियों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी ज्ञान की लौ को जीवित रखा और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए रास्ते बनाए। शिक...