कल्पना मनोरमा की कहानी ‘खाली मकान’
अपने ही घर में असुरक्षित स्त्री की कथा है कल्पना मनोरमा की कहानी ‘खाली मकान’ — चारुमित्रा,राँची(झारखंड) इंद्रप्रस्थ भारती के मई 2026 अंक में प्रकाशित कल्पना मनोरमा की कहानी ‘खाली मकान’ एक ऐसे मध्यवर्गीय परिवार की कथा है, जिसमें बच्चों के भविष्य की चिंता एक स्त्री को अपने पति से अलग रहने का निर्णय लेने के लिए विवश करती है। कहानी का आरंभ एक व्यावहारिक समस्या से होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह स्त्री की निजता, असुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था के भीतर उसकी सीमित स्वतंत्रता का प्रश्न बन जाता है। लेखिका ने एक सामान्य-सी दिखाई देने वाली घटना के माध्यम से उस मानसिक दबाव को उभारा है, जिसमें घर की जिम्मेदारियाँ निभाती स्त्री अपने ही घर में सहज और सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती। कहानी का आरंभ मध्यवर्गीय जीवन की उन विवशताओं को सामने लाता है, जिनमें नौकरी, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। यहाँ एक प्रश्न यह भी है कि परिवार के भविष्य के लिए लिए गए निर्णयों की कीमत आखिर किसे चुकानी पड़ती है। सोनाली का निर्णय स्वेच्छा और विवशता, दोनों का मिला-जुला रूप है। वह ...