पत्तियों का संसार

चित्र: प्रयाग शुक्ल आज बहुत दिनों के बाद आ. प्रयाग शुक्ल जी के चित्र-चरित्र....! - कल्पना मनोरमा Sharing a painting I did recently. पत्तियों का संसार : world of leaves : 7"×7" , mixed media on paper : prayag shukla **** भरे सावन में बादल , बिजली , रिमझिम बुँदें और चंचल पवन जब अपना संगीत छेड़ रहे हों तो चारों ओर इल्ज़ामों , सन्नाटों और विध्वंस का शोर थोड़ा थम जाता है। इसी संधिकाल में एक चित्रकार कला के चितेरों को आवाज़ लगता है ," बहुत हुआ इधर-उधर मन भटकाते हुए अब आओ पत्तियों का संसार देखो और खो जाओ हरियाली की भीनी-भीनी हरी गंध में कि हरियाला सावन उतरा है , मेघों के परों से पत्तियों के आँगन में। जब तुम हरीतिमा में टिकने की कोशिश करोगे तब मरुथल तुम्हें भरमाएगा लेकिन तुम भूलकर मत देखना उस ओर कि बादलों की मेहनत मिट्टी हो जायेगी। मेरे कैनवास पर उतर आए हैं प्रकृति के रंग-बिरंगे बेल-बूटे मेंहदी का सुर्ख रंग दबा है यहीं कहीं हरी पत्तियों की नरम हथेली में, आओ हम मिलकर उस हथेली को खोलें जिसमें त्योहार की साँझी सुगंध रची-बसी है। बसा है मानवीय ख़ुशी का साझापन. ...