ओस भरी चितवन

हरसिंगार झरने का मौसम आया है तुम कब आओगे लिख देना। पलकें उठा झाँकती है जब भोर कुहासी खिल उठता सोया कनेर आँखें मदमाती ओस भरी चितवन को मौसम भाया है। भीगा-भीगा आँगन है मन का कोना भी बिटिया का गौना है और चने बोना भी फ़सल गोड़ने-बोने का मौसम छाया है। ठिठक-ठिठक कर चलता सूरज आसमान में सिहरन भर लाती है संध्या लघु वितान में लगता है ठिठुरन का मौसम आया है। ***