अँखुआये ताले

पर्यावरण दिवस पर रिश्तों में हरियाली लौटे....... को समर्पित -------------------------------------------------------------- "हैलो मिताली! कैसी हो बेटा।" सात समुंदर पार से नीता ने फोन पर बेटी से पूछा, तो भावविभोर हो,बेटी बोल पड़ी " माँ, हम तो अच्छे हैं तू घर कब आएगी ?" "बेटा ,मुझे नहीं लगता कि अब तेरा भाई मुझे अकेले रहने के लिए घर भेजेगा । लगता है मैं कभी न..।" "क्यों माँ ? भैया आप को घुमाने के लिए बोलकर ले गए थे ।" "हाँ तू सच कह रही है, लेकिन अब योजना बदल गई।" माँ का वाक्य सुई की तरह मिताली के दिल में गढ़ा तो आँसू छलक पड़े । "बेटी कुछ तो बोल ।" मिताली न बोली मानो उसके सारे शब्द चुक गए थे। बेटी के मौन से माँ विचलित हो उठी लेकिन स्वयं को ज़ब्त करते हुए उसने बताया- "मिताली, कई दिनों से एक बात तुझसे कहना चाहती हूँ । पहले बता मेरी बात का बुरा तो नहीं मानेगी ?" बेटी ने माँ को आश्वासन दिया कि वह अपने मन की कोई भी बात उसको बता सकती है । "देख मिताली वैसे तो दामाद जी अच्छा कमाते हैं और तुझे सुंदर -से घर...