उड़ान में अभिनय

उड़ान में अभिनय ऑफिस अब सब्जेक्ट टू मार्केट नहीं, सब्जेक्ट टू होम बन चुका था | कनिका की शिकायतें जब से कोरेंटीन हुईं तब से चाय के प्लाये टूटने पर, बेटियों को होमवर्क, कुत्ते को घुमाने, डस्टिंग-मोपिंग, सब्ज़ी काटने, कूड़ा फैंकने जैसे मुद्दों पर पति से माथापच्ची करने लगी थीं | आज सुबह से दोनों पति-पत्नी अपना-अपना ऑफिस खोले, वर्क-मोर्चे पर डटे थे और बेटियाँ पढ़ाई पर | घर शान्ति के कब्ज़े में था लेकिन शांति के दामन पर टपकतीं आरो की बूँदें नगाड़े पर चोट-सी पड़ रही थीं | तंग आकर पति ने आदेश दिया-“ कनिका अपने आरो को शांत कराओ, नहीं तो मैं इसे अभी फेंक दूँगा |” “नहीं नहीं कुंदन प्यारे, हम प्यासे मर जायेंगे…|” कहते हुए पति के आदेश को मोड़कर उसने बच्चों की ओर उछाल दिया | माँ का फेंका हुआ आदेश सीधे बड़ी बेटी की किताब पर औंधे मुँह जाकर गिरा | अचानक हुए धमाके से पहले तो वह डरी लेकिन तुरंत ही उसने उसे कनू के ओर फेंक दिया | कनू तक पहुँचते-पहुँचते आदेश गेंद की तरह गोल बन चुका था इसलिए कनू ने अपनी रंग सनी तूलिका घुमा, छक्का लगा दिया और हिप-हिप हुर्रे कर नाच...