सियोल_से_सरयू

आज आवरण कथा वाचन में डॉ. सुनीता जी की सद्य प्रकाशित पुस्तक # सियोल _ से _ सरयू # का आवरण मेरे सामने है। खुलापन और तरलता संसार में दो ऐसे तत्व हैं जो हमारा ध्यान आकर्षित किए बगैर नहीं छोड़ते। सुनीता जी की कथा कृति के आवरण पर मुझे उक्त दोनों तत्व भरपूर दिख रहे हैं। एक तरफ खुला आसमान है तो दूसरी ओर जल से समृद्ध किल्लोल करती हुई नदी दिख रही है। मानवीय सभ्यता फलने-फूलने में यही दो तत्व सर्वाधिक आवश्यक रहे होंगे ज्ञान पिपासुओं के लिए। कौन नहीं जानता होगा कि नदियों के किनारों पर मानवीय जीवन ने सभ्य गति पकड़ी। वैसे भी खुलापन विचारों का हो या स्थान का हमें अपनी ओर आकर्षित कर निबद्ध कर ही लेता है। " सियोल से सरयू" कृति के आवरण को देखते हुए भी एक शांत खिंचाव महसूस हो रहा है। शांत मन रंगों का मेलजोल आँखों के साथ मन को सुकून दे रहे हैं। अर्थ के मामले में खुलापन रिक्तता बिल्कुल नहीं होता। खुलेपन का तात्पर्य मुक्तता-बंधनहीन होना है। हम जब प्रेमी या मित्र की ख़ोज करते हैं तो उसके हृदय का खुलापन और संवेदना की तरलता को पहले टटोलते हैं और जब घर बनाने या खोजने के लिए निकलते हैं तो लिविंग ए...