इलाइची का पुष्प

हर फल से पहले संसार में उसका फूल आता है , जो बेहद कोमल और सुंदर होता है। क्या मनुष्य का भी.... ? निश्चित ही। शारीर विज्ञान पढ़ने और पढ़ाने वाले बताते हैं कि मानव फूल भी बेहद खूबसूरत और मोहक होता है। खैर , यहां बात हो रही है छोटी इलाइची के फूल की जो अपने आप में बेहद आकर्षक लग रहा है। इलाइची की खुशबू से कौन परिचित न होगा! वैसे फूल बांस का भी बहुत सुंदर होता है किंतु उसे शुभ नहीं माना जाता किंतु बांस इस भाव से परे ही रहता है। प्रकृति की संरचना में उपजती सृष्टि अभिष्ठ तो होती ही है साथ में उसकी निरापद अबोधता मन को बांधती भी है। प्राकृतिक रौ में सोचकर देखो तो बुरा भी लगता है कि जो तत्व अबोला और अहेतुक होता है , भला उसे शुभ अशुभ की डोर से कैसे बांध दिया जाता है। मुझे लगता है ईश्वर की संरचना में मनुष्य को छोड़कर किसी में भी अपने होने का अहम नहीं होता तो उसमें शुभता और अशुभता की मुहर लगाना क्या उचित होगा ? एक बात , दूसरे किसी एक व्यक्ति का अनुभव सभी प्राणियों का अनुभव नहीं बन सकता है तो फिर गांठ किस बात की ? हां , यहां से रूढ़ी पंथ का जन्म ज़रूर होता है जो जीवनपर्यन्त एक खुश मिजाज़ आ...