देखा एक सपना : बालमन की खिड़की से जीवन-दर्शन
समीक्षक : वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सुरेंद्र विक्रम देखा एक सपना : बालमन की खिड़की से जीवन-दर्शन कविताओं के बाद कहानियाँ बच्चों की दूसरी पसंद होती हैं। विशेष रूप से बच्चे उन कहानियों को अधिक पढ़ना चाहते हैं, जिनमें उनका अपना संसार समाया होता है। उनके आसपास का वातावरण, उनकी अपनी दुनिया, उनका मनोविज्ञान, उनकी सूझ-बूझ और उन्हें भीतर तक स्पर्श करती भाषा-शैली—इन सबके मेल से जो वातावरण निर्मित होता है, वही महत्त्वपूर्ण बालसाहित्य की आधारभूमि बनता है। कल्पना मनोरमा अपने बालकथा-संग्रह ‘देखा एक सपना’ में जिस विनम्रता और सहजता के साथ अपने भावों को पिरोते हुए अलग-अलग प्रतीकों के माध्यम से अपनी बात कहती हैं, वह पाठकों के मानस-पटल पर लंबे समय तक अंकित रहती है। संग्रह के आरंभ में प्रकृति के विभिन्न उपादानों के माध्यम से किशोर पीढ़ी के लिए की गई यह कामना अत्यंत अर्थपूर्ण है— «आँचल फैलाकर माँगती हूँ अपनी किशोर पीढ़ी के लिए आसमान से विचारों की ऊँचाई और खुलापन धरती से गहराई और धैर्य वायु से ताजगी और सहज बहाव दूब से नम जिजीविषा फलदार वृक्षों से विनम्रता और सौहार्...