पेंच कटने के बाद
पेंच कटने के बाद यूँ तो झाड़ियों में अटकना बिल्कुल ठीक नहीं, लेकिन जब कोई तुम्हें अचानक छोड़ ही दे, पेंच काट ही दे, तो तुम पतंग बन जाना। आसमान न सही, किसी झाड़ी पर टिक जाना। कोई न कोई तुम्हें उतार लेगा, जीत की खुशी के साथ। पतंग का झाड़ी या पेड़ की शाख पर अटक जाना सामान्यतः एक दुर्घटना माना जाता है। वह अब आकाश में नहीं है। उसकी डोर टूट चुकी है। उसकी दिशा और गति दोनों छिन चुकी हैं। लेकिन यदि ध्यान से देखा जाए तो वह पूरी तरह नष्ट भी नहीं हुई है। वह अब भी मौजूद है, किसी शाख पर, किसी उलझन के बीच, किसी अनिश्चित प्रतीक्षा में। शायद जीवन के कुछ अनुभव भी ऐसे ही होते हैं। वे हमें यह समझाते हैं कि हर टूटन का अर्थ अंत नहीं होता। जीवन में ऐसे दिन भी आते हैं जब लगता है कि अब कुछ नहीं बचा। जो अपना था, वह छूट गया। जिस रास्ते पर चल रहे थे, वह बंद हो गया। जिन लोगों पर भरोसा था, वे साथ नहीं रहे। ऐसे समय में मनुष्य को किसी बड़ी जीत की नहीं, अपितु इतना भर जान लेने की आवश्यकता होती है कि इतना सब घट जाने के बाद भी उसका जीवन बचा हुआ है। हम ऐसे समाज में रहते हैं जहा...