भारतीय मेधा: आनंदीबाई जोशी
आनंदीबाई जोशी भारतीय स्त्री मेधा: सीमाओं में रहकर असीमित होना चुना 31 मार्च 1865 को आनंदीबाई जोशी का जन्म हुआ। उनका बचपन का नाम यमुना था। वे एक मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्मी थीं। उनके पिता गणपतराव अमृतश्वर जोशी और माता गंगाबाई थीं। किसी स्त्री को समझने के लिए केवल उसके जन्म और परिवार का परिचय पर्याप्त नहीं होता, उस समय, समाज और परिवेश को भी देखना पड़ता है, जिसमें उसने अपना जीवन शुरू किया। उन्नीसवीं सदी में भारतीय स्त्री के लिए परिवार, विवाह और घरेलू जीवन ही प्रमुख थे। ऐसे परिवेश में अपने भीतर की किसी अलग आकांक्षा को पहचानना और फिर उसके लिए रास्ता बनाना कितना कठिन रहा होगा! आनंदीबाई जोशी का जीवन इसी प्रश्न के आसपास खुलता है। नौ वर्ष की आयु में उनका विवाह उनसे उम्र में बड़े गोपालराव जोशी से हुआ, जो डाक विभाग में कार्यरत थे। विवाह के बाद यमुना का नाम आनंदीबाई रख दिया गया। गोपालराव शिक्षा के महत्त्व को समझते थे और उन्होंने आनंदीबाई को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। बाल-विवाह की तमाम विद्रूपताओं के बीच शिक्षा उनके जीवन में एक नई संभावना बनकर उभरने लगी। तेरह वर्ष की आयु में उन्...