टिनी का सपना
टिनी का सपना टिनी एक चंचल बच्ची थी। वह कहानियाँ सुनते हुए खाना खाती थी। उसका कमरा रंग-बिरंगी तितलियों की तस्वीरों से सजा था। एक रात नानी ने उसे सुनहरी परी की कहानी सुनाई। कहानी में परी की जादूगरी और हीरे जड़े पंखों वाली तितली की बातें सुनकर टिनी कल्पनालोक में खोती जा रही थी। कहानी पूरी होने पर नानी अपने कमरे में सोने चली गईं। लेकिन टिनी को नींद नहीं आ रही थी। उसके मन में बार-बार वही सुनहरी परी और चमचमाती तितली घूम रही थी। सोचते-सोचते उसे पता ही नहीं चला कि वह कब सो गई। सोते ही वह एक सुंदर सपने में पहुँच गई। सपने में टिनी ने देखा कि वह एक हरे-भरे जंगल में खड़ी है। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पेड़ हैं। सूरज की सुनहरी किरणें पत्तों के बीच से झर रही हैं। तभी उसकी नज़र एक अद्भुत तितली पर पड़ी। उसके पंखों पर मानो हीरे जड़े हुए थे। सूरज की रोशनी पड़ते ही उसके पंख नीले, पीले, लाल और बैंगनी रंगों में चमक उठते। तितली धीरे-धीरे टिनी के पास आई और बोली, "डरो मत, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।" टिनी बहुत खुश हुई। व...