गलती और चरित्र एक ही बात नहीं
गलती और चरित्र एक ही बात नहीं बुनियादी चिंतन : बालिका से वामा | स्तंभ 34 जीवन में लिए गए कुछ निर्णय सही सिद्ध होते हैं। कुछ गलत साबित होते हैं। कुछ संबंध टिकते हैं। कुछ टूट जाते हैं। कुछ अवसरों पर हमें संतोष मिलता है। कुछ अवसरों पर लगता है कि शायद हम बेहतर कर सकते थे। जबकि मनुष्य होने का अर्थ ही अपूर्ण होना है। फिर भी स्त्रियाँ अपनी किसी गलती को केवल एक घटना की तरह नहीं देख पातीं। वे उसे अपने व्यक्तित्व से जोड़कर देखने लगती हैं। चूक होने पर वे यह नहीं सोचतीं कि निर्णय गलत था। उन्हें लगने लगता है कि स्वयं उनमें ही कोई कमी है। यहीं से एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठता है। स्त्री की पृष्ठभूमि क्या रही। उसे स्नेह और संस्कार देने वाले हाथ तथा मन कैसे थे? क्योंकि कोई भी भावनात्मक प्रवृत्ति अचानक विकसित नहीं होती। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि इसका कारण केवल सामाजिक प्रशिक्षण है या इसके पीछे मनुष्य की कुछ गहरी भावनात्मक संरचनाएँ भी कार्य करती हैं। मानी हुई बात है कि लड़कियों को बचपन से संबंधों की भाषा निज भाषा से पहले स...