एक दिन का सफ़र ( समीक्षा: आशा पाण्डेय)
मनुष्य के अंतर्मन की यात्राओं का कथा-संसार : एक दिन का सफर कल्पना मनोरमा का प्रथम कहानी-संग्रह एक दिन का सफर समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में अपनी विशिष्ट संवेदनात्मक दृष्टि और मानवीय सरोकारों के कारण ध्यान आकर्षित करता है। संग्रह में कुल बारह कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें स्त्री जीवन, पारिवारिक संबंध, सामाजिक विसंगतियाँ, पीढ़ियों के बदलते मूल्य, आर्थिक संघर्ष, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय आत्मबल जैसे विविध विषयों को कथा का आधार बनाया गया है। इन कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें बाहरी घटनाओं की अपेक्षा पात्रों के भीतर घटित होने वाली मानसिक और भावनात्मक प्रक्रियाएँ अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस दृष्टि से यह संग्रह केवल घटनाओं का नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन की यात्राओं का दस्तावेज़ बन जाता है। संग्रह की पहली कहानी ‘कितनी कैदें’ सामाजिक पूर्वाग्रहों और स्त्री जीवन पर लगाए गए अनावश्यक प्रतिबंधों की मार्मिक कथा है। कहानी यह रेखांकित करती है कि संदेह, बदनामी का भय और पितृसत्तात्मक सोच किस प्रकार एक लड़की के व्यक्तित्व और उसके भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। कहानी की ब...