भारतीय स्त्री मेधा : सीमाओं में रहकर असीमित होना चुना।
सावित्रीबाई फुले भारतीय स्त्री मेधा : सीमाओं में रहकर असीमित होना चुना। स्तंभ 1 कल्पना मनोरमा भारत की धरती ने ऐसी अनेक महिलाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने समय की सीमाओं को तोड़ा और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने साबित किया कि स्त्री केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। उसकी बुद्धि, संवेदना, कल्पना और साहस समाज को बदल सकते हैं। ऐसी ही महान स्त्री थीं सावित्रीबाई फुले। सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था। उनका बचपन ऐसे समय में बीता, जब लड़कियों की पढ़ाई को जरूरी नहीं माना जाता था। समाज में यह धारणा गहरी थी कि शिक्षा पुरुषों का अधिकार है, और लड़कियों का काम केवल घर संभालना है। उनका विवाह कम उम्र में ज्योतिराव फुले से हुआ। ज्योतिराव शिक्षा और सामाजिक समानता के समर्थक थे। उन्होंने सावित्रीबाई को पढ़ना-लिखना सिखाया। सावित्रीबाई ने भी पूरे मन से शिक्षा ग्रहण की। यही शिक्षा आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा हथियार बनी। उन्होंने समझ लिया था कि शिक्षा केवल अक्षर पहचा...