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Showing posts from June 18, 2026

टिनी का सपना

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                   टिनी का सपना     टिनी एक चंचल और प्यारी बच्ची थी। उसे कल्पनाओं की दुनिया में खोए रहना बहुत पसंद था। वह कहानियाँ सुनते-सुनते खाना खाती और कभी-कभी अपने विचारों में इतनी खो जाती कि आसपास की बातें भी भूल जाती। उसकी छोटी-छोटी शरारतें घर के सभी लोगों को बहुत भाती थीं। टिनी का कमरा रंग-बिरंगी तितलियों की तस्वीरों और खिलौनों से सजा हुआ था।   एक रात उसकी नानी ने उसे सुनहरी परी और उसकी पालतू तितली की कहानी सुनाई। उस तितली के पंखों पर हीरे जड़े थे, जो सूरज की रोशनी में इंद्रधनुष की तरह चमकते थे। परीलोक का वर्णन सुनकर टिनी मंत्रमुग्ध हो गई। सबसे अधिक उसे हीरे-जड़े पंखों वाली तितली की बातें अच्छी लगीं। उस दिन उसने नानी से दूसरी कहानी सुनाने की जिद भी नहीं की। कहानी समाप्त होते ही नानी अपने कमरे में चली गईं और टिनी धीरे-धीरे नींद की गोद में खो गई। नींद में उसने एक अद्भुत सपना देखा। वह परीलोक पहुँच गई थी। वहाँ सब कुछ चमक रहा था। परी कहीं बाहर गई हुई थी, लेकिन महल के दरवाज़े पर चमचमाते पंखों वाली त...

सीमाओं के बीच शिक्षा का उजास (शैक्षिक दख़ल के ताज़ा अंक में)

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                सीमाओं के बीच शिक्षा का उजास               मनुष्य का जीवन अपने प्रारंभिक अबोध अनुभवों से ही आकार लेना आरम्भ कर देता है। जिस परिवेश में मनुष्य जन्म लेता है, जिन लोगों की आँखों के सहारे से दुनिया को पहली बार देखता है, और जिस संस्कृति में बोलना, देखना, महसूस करना और अभिव्यक्त करना सीखता है, वही सब मिलकर उसकी प्रौढ़ दृष्टि और समझ का आधार बनती हैं। मेरे अनुभव का संसार का आधार, वह परिवेश रहा जो एक गाँव का आँगन था, उत्तर प्रदेश के औरैया तहसील, जिला इटावा का एक छोटा सा गाँव अटा। जितना बाहर से यह गाँव अन्य गाँवों जैसा ही सरल, स्वच्छ और सुसंस्कृत दिखता रहा, उतना ही भीतर से विरोधाभासों, सीमाओं, भावुकता, विरोध और अवरोधों से भरा हुआ था। इस में प्राथमिक पाठशाला तो थी, पर अस्पताल, पंचायत भवन या पुस्तकालय जैसी सुविधाएँ नहीं थीं। फिर भी यह गाँव समृद्ध किसानों और व्यवसायियों का गांव बना रहा। अन्य जरूरतों के लिए तीन से चार किलो मीटर की दूरी तय कर अपने सुख सुविधाओं का जुटान करता गाँव अपने आसपास किसानों की...