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बालमन, प्रकृति और संस्कारों का जीवंत संसार : ‘देखा एक सपना’

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बालमन, प्रकृति और संस्कारों का जीवंत संसार : ‘देखा एक सपना’ समकालीन हिंदी बालसाहित्य में ऐसे रचनाकार अपेक्षाकृत कम हैं, जो मनोरंजन और शिक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए बच्चों की जिज्ञासाओं, भावनाओं और सामाजिक सरोकारों को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त कर सकें। कल्पना मनोरमा इसी श्रेणी की सशक्त बालसाहित्यकार हैं। उनकी रचनाओं में बालमन की सहजता, प्रकृति के प्रति अनुराग, मानवीय संवेदनाएँ तथा जीवन-मूल्यों के प्रति गहरी आस्था दिखाई देती है। उनका बाल कहानी-संग्रह ‘देखा एक सपना’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि इसमें संगृहीत ग्यारह कहानियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि बच्चों के भीतर संस्कार, संवेदना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य भी करती हैं। बालसाहित्य की सार्थकता इसी में है कि वह बच्चे को उपदेश देकर नहीं, बल्कि अनुभव और आनंद के माध्यम से जीवन की उपयोगी सीख प्रदान करे। ‘देखा एक सपना’ इस कसौटी पर सफल सिद्ध होता है। संग्रह की कहानियाँ विविध विषयों को समेटे हुए हैं- प्रकृति, परिवार, अनुशासन, पर्यावरण, आत्मनिर्भरता, श्रम-सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्...