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Showing posts from June 17, 2026

टिनी का सपना

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                   टिनी का सपना     टिनी एक चंचल और प्यारी बच्ची थी। उसे कल्पनाओं की दुनिया में खोए रहना बहुत पसंद था। वह कहानियाँ सुनते-सुनते खाना खाती और कभी-कभी अपने विचारों में इतनी खो जाती कि आसपास की बातें भी भूल जाती। उसकी छोटी-छोटी शरारतें घर के सभी लोगों को बहुत भाती थीं। टिनी का कमरा रंग-बिरंगी तितलियों की तस्वीरों और खिलौनों से सजा हुआ था।   एक रात उसकी नानी ने उसे सुनहरी परी और उसकी पालतू तितली की कहानी सुनाई। उस तितली के पंखों पर हीरे जड़े थे, जो सूरज की रोशनी में इंद्रधनुष की तरह चमकते थे। परीलोक का वर्णन सुनकर टिनी मंत्रमुग्ध हो गई। सबसे अधिक उसे हीरे-जड़े पंखों वाली तितली की बातें अच्छी लगीं। उस दिन उसने नानी से दूसरी कहानी सुनाने की जिद भी नहीं की। कहानी समाप्त होते ही नानी अपने कमरे में चली गईं और टिनी धीरे-धीरे नींद की गोद में खो गई। नींद में उसने एक अद्भुत सपना देखा। वह परीलोक पहुँच गई थी। वहाँ सब कुछ चमक रहा था। परी कहीं बाहर गई हुई थी, लेकिन महल के दरवाज़े पर चमचमाते पंखों वाली त...

मनुष्य होने की विधि

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मनुष्य होने की विधि कल्पना मनोरमा कुछ समय से एक प्रश्न मन में बार-बार उठ रहा है। हम किसी व्यक्ति की सफलता, प्रसिद्धि, प्रतिभा और उपलब्धियों को देखकर मान लेते हैं कि उसके भीतर गहरा आत्मविश्वास भी होगा। लेकिन क्या आत्मविश्वास का संबंध केवल उपलब्धियों से है? आधुनिक समाज ने आत्मविश्वास को प्रायः व्यक्तिगत सफलता से जोड़ दिया है। जो व्यक्ति अपने मन का जीवन जी रहा है, आर्थिक रूप से स्वतंत्र है, सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त है और अपने निर्णय स्वयं ले सकता है, उसे आत्मविश्वासी माना जाता है। यह धारणा पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन अधूरी अवश्य है। आत्मविश्वास का एक दूसरा स्रोत भी है, जिस पर कम चर्चा होती है। वह है उत्तरदायित्व। मनुष्य केवल इच्छाओं वाला प्राणी नहीं है। वह संबंधों वाला प्राणी भी है। उसका जीवन अकेले नहीं बनता। जन्म से लेकर मृत्यु तक वह परिवार, समाज, मित्रता, प्रेम, सहयोग और परंपरा जैसी अनेक संरचनाओं के भीतर जीता है। इसलिए मनुष्य होने का अर्थ केवल स्वतंत्र होना नहीं, बल्कि उत्तरदायी होना भी है। यहीं से "मनुष्य होने की विधि" का प्रश्न सामने आता है। मनुष्य होने की विधि ...