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Showing posts from June 30, 2026

एक दिन का सफ़र ( समीक्षा: आशा पाण्डेय)

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मनुष्य के अंतर्मन की यात्राओं का कथा-संसार : एक दिन का सफर कल्पना मनोरमा का प्रथम कहानी-संग्रह एक दिन का सफर समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में अपनी विशिष्ट संवेदनात्मक दृष्टि और मानवीय सरोकारों के कारण ध्यान आकर्षित करता है। संग्रह में कुल बारह कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें स्त्री जीवन, पारिवारिक संबंध, सामाजिक विसंगतियाँ, पीढ़ियों के बदलते मूल्य, आर्थिक संघर्ष, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय आत्मबल जैसे विविध विषयों को कथा का आधार बनाया गया है। इन कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें बाहरी घटनाओं की अपेक्षा पात्रों के भीतर घटित होने वाली मानसिक और भावनात्मक प्रक्रियाएँ अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस दृष्टि से यह संग्रह केवल घटनाओं का नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन की यात्राओं का दस्तावेज़ बन जाता है। संग्रह की पहली कहानी ‘कितनी कैदें’ सामाजिक पूर्वाग्रहों और स्त्री जीवन पर लगाए गए अनावश्यक प्रतिबंधों की मार्मिक कथा है। कहानी यह रेखांकित करती है कि संदेह, बदनामी का भय और पितृसत्तात्मक सोच किस प्रकार एक लड़की के व्यक्तित्व और उसके भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। कहानी की ब...

देखा एक सपना (समीक्षा : शिखर जैन)

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कल्पना मनोरमा भाषा की अध्यापक रही हैं। वे संस्कृत और हिंदी की विद्वान हैं। जाहिर है, इन दोनों भाषाओं में उनका ज्ञान अत्यंत समृद्ध होगा। लेकिन जब वे बच्चों के लिए कथाएं लिखती हैं तो उन्हें पता होता है कि बाल साहित्य लेखक की विद्वता का भौंडा प्रदर्शन नहीं, बल्कि परिपक्वता का दर्पण होना चाहिए। एक अच्छे बालसाहित्यकार को यह पता होना चाहिए कि वह जिन पाठकों के लिए लिख रहा है, उन्हें क्या सीखना, समझना, जानना और पढ़ना चाहिए। "निक्कू फेमस हो गया" कहानी के शीर्षक में लेखिका ने अंग्रेज़ी के "फेमस" शब्द का प्रयोग किया है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि वे इसके हिंदी शब्द से परिचित नहीं हैं। बल्कि वे जानती हैं कि साहित्य की ग्राह्यता के लिए उसका पाठकों से जुड़ाव भी ज़रूरी है। समय की नज़ाकत को देखते हुए इस कहानी में आप एक्टिविटी, पेटीएम और 50 आउट ऑफ 50 इन एवरी सब्जेक्ट जैसे अंग्रेजी शब्दों और वाक्यों को पढ़ सकते हैं।   उन्होंने दूब-सी नरम और लचीली, मगर मजबूत जड़ों वाली 11 बाल जीवनोपयोगी, रोचक कहानियाँ लिखकर बच्चों का साहित्य थोड़ा और समृद्ध कर दिया है। इतना ही नहीं, पुस्तक...