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Showing posts from August 8, 2026

प्यास से मुमुक्षा तक : स्मृति में बचा एक शहर

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प्यास से मुमुक्षा तक : स्मृति में बचा एक शहर “इस शहर में इक शहर था“  यह उपन्यास अभी हाल ही में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होकर आया है। इसके आवरण को देखा तो एक अजीब-सी उदासी महसूस हुई। जर्जर दीवारें, पुराना-सा मकान, बालकनी में खड़ी एक स्त्री जो शोक में डूबी है। आवरण पर लिखा शीर्षक ‘इस शहर में एक शहर था’ मन में एक सवाल आया, कौन-सा शहर?     सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला शब्द है ‘था’। शहर ‘है’ क्यों नहीं, ‘था’ क्यों है? यही ‘था’ इस शीर्षक में एक उदासी का कारक बन जाता है। शहर केवल मकानों और गलियों से नहीं बनता। उसमें लोग और उनकी आवाजें होती हैं, रिश्ते होते हैं, भाषा होती है और स्मृतियाँ होती हैं। इनमें से कुछ बदल जाए तो शहर अपनी जगह मौजूद रहकर भी भीतर से ‘था’ हो सकता है।  इस कृति में बात शिकारपुर की है। सिंधी माध्यम स्कूलों की है। सिंधी भाषा की है। छूटने और भूलने की है। विस्थापन का दर्द प्रसव पीड़ा से कम नहीं।     उपन्यास का शहर गलियों और मकानों से आगे जाकर स्मृति का शहर बन जाता है। वह कथावाचक नन्द की यादों में है। उन्हीं लोगों म...

स्त्रियाँ: आवाज़ों के बीच एक स्त्री-संसार

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स्त्रियाँ: आवाज़ों के बीच एक स्त्री-संसार किसी पुस्तक को पढ़ना कई बार उसके भीतर प्रवेश करने से पहले ही शुरू हो जाता है। आवरण, फ्लैप पर दी गई जानकारी, लेखक और अनुवादक का परिचय पाठक के मन में पुस्तक की पहली छवि बनाते हैं। ‘स्त्रियां’ काव्य-संग्रह के साथ मेरा अनुभव कुछ ऐसा ही रहा। पुस्तक के फ्लैप पर प्रो. गायत्रीबाला पंडा का परिचय दिया गया है। वे ओड़िया की प्रमुख कवयित्री, उपन्यासकार, कथाकार और निबंधकार हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। इस पुस्तक का हिंदी रूपांतरण राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने किया है। मूल रचना ओड़िया में है। इसलिए हिंदी में इसे पढ़ते हुए भाषा के साथ उस सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ को भी महसूस किया, जिसमें ये कविताएँ जन्मी हैं। किताब के शीर्षक पर आते ही मैं ‘स्त्रियां’ शब्द पर ठिठक जाती हूँ। स्त्रियां!अर्थात एक स्त्री नहीं। किसी एक भूगोल की स्त्री नहीं। किसी एक जाति, वर्ग, भाषा, संस्कृति या समय की स्त्री नहीं। फिर ये स्त्रियां कौन हैं? संसार भर की सारी स्त्रियां? स्त्रियों के रंग रूप पर जलवायु और भूगोल का असर है। उनके शरीर अलग ह...