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रिश्तों के विडंबनात्मक विद्रूप में घिरी नारी की गाथा - डॉ. अश्वनी शांडिल्य

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डॉ. अश्वनी शांडिल्य जी के साथ पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़  रिश्तों के विडंबनात्मक विद्रूप में घिरी नारी की गाथा                                   - डॉ. अश्वनी शांडिल्य संवेदनात्मक अनुभूति जब लेखनी के माध्यम से कागज पर उतरती है तो सार्थक, उपयोगी तथा वांछित साहित्य का सृजन होता है। रचनाकार जब पीड़ा और प्रसन्नता की गहरी अनुभूति तक पहुँचकर लिखता है तो वह निष्पक्ष, मार्मिक व मानवीय कृति समाज को देता है। कल्पना मनोरमा द्वारा रचित कहानी संग्रह ‘एक दिन का सफर’ बारह कहानियों को लिए हुए, मानवीय करुणा, रिश्तों की विद्रूपता व विडम्बना, सामाजिक तथा पारिवारिक परिवेश में आ रहे स्वार्थपरक परिवर्तनों को कलात्मक ढंग से दर्ज करता है। स्त्री होने के नाते लेखिका के भुक्त तथा दृष्ट अनुभवों का चित्रण नारी पीड़ा को जीवन्त अभिव्यक्ति देने में समर्थ हुआ है। यहाँ स्त्री विमर्श को लगभग हर कहानी में अनुभव किया जा सकता है जो सत्य और स्वाभाविकता के पथ से कहीं भी विचलित नहीं होता। यह संग्रह स्थान-स्थान पर नारी-सशक्तीकरण ...