अपनी कमाई, अपने फैसले : आर्थिक विवेक की जरूरत
अपनी कमाई, अपने फैसले : आर्थिक विवेक की जरूरत बुनियादी चिंतन : बालिका से वामा। स्तंभ 47 स्त्री ही नहीं, पुरुष भी तभी आर्थिक रूप से सुदृढ़ माना जा सकता है, जब उसके पास आय का पर्याप्त और स्थिर साधन हो। व्यक्ति की आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार आर्थिक स्वतंत्रता है। लेकिन आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ केवल आय होना नहीं है। उसका संबंध इस बात से भी है कि व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति को समझता है या नहीं और उससे जुड़े निर्णयों में उसकी कितनी भूमिका है। इसी दृष्टि से अतीत की कुछ सामाजिक व्यवस्थाओं को भी देखा जा सकता है। जिन परिस्थितियों में स्त्रियों के लिए स्वतंत्र रूप से आय अर्जित करना सहज नहीं था, वहाँ विवाह के समय मायके से मिला धन, आभूषण या संपत्ति कई बार उसके लिए निजी आर्थिक सहारे की भूमिका निभाता रहा होगा। अलग-अलग समाजों और परिस्थितियों में इसका स्वरूप अलग रहा है। इसलिए इसे केवल एक सामाजिक प्रथा के रूप में देखने के बजाय उस समय स्त्री की आर्थिक सुरक्षा के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। आज परिस्थितियाँ बदल रही हैं। इसलिए सवाल यह नहीं है कि विवाह के समय बेटी को कितना दिया जाए, बल्कि ...