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Showing posts from September 10, 2026

देखा एक सपना : बालमन की खिड़की से जीवन-दर्शन

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      समीक्षक : वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सुरेंद्र विक्रम देखा एक सपना : बालमन की खिड़की से जीवन-दर्शन कविताओं के बाद कहानियाँ बच्चों की दूसरी पसंद होती हैं। विशेष रूप से बच्चे उन कहानियों को अधिक पढ़ना चाहते हैं, जिनमें उनका अपना संसार समाया होता है। उनके आसपास का वातावरण, उनकी अपनी दुनिया, उनका मनोविज्ञान, उनकी सूझ-बूझ और उन्हें भीतर तक स्पर्श करती भाषा-शैली—इन सबके मेल से जो वातावरण निर्मित होता है, वही महत्त्वपूर्ण बालसाहित्य की आधारभूमि बनता है। कल्पना मनोरमा अपने बालकथा-संग्रह ‘देखा एक सपना’ में जिस विनम्रता और सहजता के साथ अपने भावों को पिरोते हुए अलग-अलग प्रतीकों के माध्यम से अपनी बात कहती हैं, वह पाठकों के मानस-पटल पर लंबे समय तक अंकित रहती है। संग्रह के आरंभ में प्रकृति के विभिन्न उपादानों के माध्यम से किशोर पीढ़ी के लिए की गई यह कामना अत्यंत अर्थपूर्ण है— «आँचल फैलाकर माँगती हूँ अपनी किशोर पीढ़ी के लिए आसमान से विचारों की ऊँचाई और खुलापन धरती से गहराई और धैर्य वायु से ताजगी और सहज बहाव दूब से नम जिजीविषा फलदार वृक्षों से विनम्रता और सौहार्...

पंडिता रमाबाई

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पंडिता रमाबाई  भारतीय स्त्री मेधा : सीमाओं में रहकर असीमित होना चुना। स्तंभ 2 पंडिता रमाबाई का जन्म 23 अप्रैल 1858 को हुआ। उनके पिता अनंत शास्त्री डोंगरे संस्कृत के विद्वान थे और वे स्त्रियों की शिक्षा के समर्थक थे। उन्होंने अपनी पत्नी लक्ष्मीबाई को संस्कृत सिखाई और लक्ष्मीबाई आगे रमाबाई की पढ़ाई में प्रेरणा बनीं। रमाबाई की शुरुआती शिक्षा घर में ही हुई। माँ उन्हें संस्कृत के श्लोक और धार्मिक ग्रंथ पढ़ाती थीं। उस समय लड़कियों के लिए संस्कृत और शास्त्रों का अध्ययन सामान्य नहीं माना जाता था। घर में मिली इस शिक्षा ने रमाबाई को केवल बहुत कुछ याद करना नहीं सिखाया, बल्कि स्वयं सीखने का भरोसा भी दिया। आगे चलकर यही शिक्षा उनकी विद्वत्ता की पहली नींव बनी। रमाबाई का बचपन एक जगह ठहरकर नहीं बीता। उनके पिता धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते थे और इसी क्रम में परिवार को अलग-अलग स्थानों की यात्रा करनी पड़ती थी। इन यात्राओं में रमाबाई ने भारत के अनेक क्षेत्रों और वहाँ के जीवन को करीब से देखा। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, फिर भी पढ़ने और शास्त्रों को समझने का क्रम बना रहा। कम उम्र में ही उ...