लीक से हटकर बाल कहानी संग्रह: देखा एक सपना


लीक से हटकर बाल कहानी संग्रह: देखा एक सपना 

-रश्मि अस्थाना 

यह सच है कि हर मुलाकात एक बहाना होती है। कुछ यूं ही मेरी मुलाकात कल्पना जी से हुई। उनसे मेरी मुलाकात फेसबुक की मार्फत हुई। मैं अक्सर उनकी रचनाएं फेसबुक पर पढ़ती थी। एक दिन उनके बाल कहानी संग्रह 'देखा एक सपना' की पोस्ट देखी। उसकी रूपरेखा, उसके चित्र देखकर कुछ ऐसा अंदाज़ा सा हुआ कि यह कुछ अलग है। हालांकि, मीडिया पर बहुत सी पुस्तकों की चर्चाएं होती रहती हैं। लेकिन ऐसा होता है कि पोस्ट से नज़र हटी और बात आई-गई हो गई। लेकिन उस पुस्तक को देखकर कुछ ऐसा लगा कि नहीं, इसमें कुछ तो बात है। इसे देखना चाहिए, पढ़ना चाहिए। पुस्तक प्राप्त हुई और मैंने उसको पढ़ा तो लगा कि मेरा अंदाज़ा ठीक था।

वास्तव में उनका बाल कहानी संग्रह लीक से हटकर है। ऐसी कहानियां जो आपको सपनों की दुनिया में ले जाती हैं, एक ऐसे संसार में, जहां बचपन हंसता-मुस्कुराता है, जहां केवल कोमल भाव हैं, जहां पर कोई चतुराई नहीं है, सिर्फ नादानियां हैं, अपनापन है, चुलबुलाहट है और साथ ही बहुत कुछ जानने की इच्छा भी है और अंत में एक शिक्षा भी।

पुस्तक की हर कहानी एक नए आवरण में है। एक नए कलेवर में है। अगर मैं कहूं कि यह बाल कथा संग्रह, गागर में सागर है, तो यह उपयुक्त होगा। इसकी हर कहानी बचपन की ओर खींचती है, हरेक कथानक ऐसा लगता है जैसे कहीं न कहीं, आपके अगल-बगल किसी दौर में था या आपने भी इसको कहीं देखा है, इसका अनुभव किया है।

कहानी के पात्र भी बिल्कुल सरस हैं, सरल हैं। भाषा भी आम है। हर कहानी के आरम्भ में पात्रों में बालपन झलकता है, नादानी और सहजता दिखती है, लेकिन अचानक से कहानी में एक नया मोड़ आ जाता है और वह मोड़ उस कहानी को एक शिक्षाप्रद कहानी बना देता है।

कल्पना जी की कहानियों की यही खासियत है कि हर कहानी बहुत स्वाभाविक, सरल, सहज अभिव्यक्ति के साथ वार्तालाप शैली में शुरू होती है। लेकिन उसी कहानी के मध्य भाग तक आते-आते आपको ऐसा लगने लगता है कि इसमें कुछ परिवर्तन है और यही परिवर्तन एक नवीनता का प्रयास है। कहानी का यही मोड़ पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि नहीं, यह साधारण बाल कहानी नहीं है। इस कहानी को लिखने वाले कहानीकार की भाषा की इसमें छाप है। कुछ नयापन है।

कहानी का भोला-भाला पात्र कहानी के मध्य भाग तक आते-आते एक जिज्ञासु पात्र बन जाता है और उस पात्र की जिज्ञासा को प्रौढ़ पात्र बड़ी सरलता से शांत करता है। इस प्रयास में कहानी की सहजता और प्रवाह कहीं भी टूटता नज़र नहीं आता है। इस तरह हर कहानी पाठक की जिज्ञासा को जगाती और उसको शांत करती प्रतीत होती है।

कहीं भी शब्दों में भारीपन नहीं है, कहीं कुछ ऐसा प्रयास नहीं किया गया है, जिससे लगे कि जबरदस्ती घटनाओं को परोसा गया है। हर कहानी सशक्त है। बेशक छोटी-छोटी बाल कहानियां हैं, पर हरेक कहानी को पढ़ने से लगता है कि जैसे आपने सिर्फ कहानी ही नहीं पढ़ी, आपने इससे बहुत कुछ सीख भी ली है।

भले ही एक बाल कहानी पुस्तक को कुछ ही पलों में पूरा पढ़ा जा सकता था, लेकिन मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा कि मैं इसको एक बार में पढ़ कर पूरी समाप्त कर दूं, क्योंकि मात्र दो-तीन पन्नों की एक कहानी भी आपके दिमाग की क्षुधा को शांत कर देती है।

मेरा तो यही अनुभव है, आप पुस्तक पढ़ कर बताएं कि आपका अनुभव कैसा रहा?



पुस्तक: देखा एक सपना

लेखक: कल्पना मनोरमा

प्रकाशक: आनंद प्रकाशन

(नई किताब)

कीमत: ₹150

पृष्ठ संख्या: 78

समीक्षक: रश्मि अस्थाना


Comments

  1. एक अच्छी पुस्तक की सुंदर समीक्षा

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