देखा एक सपना (समीक्षा : शिखर जैन)



कल्पना मनोरमा भाषा की अध्यापक रही हैं। वे संस्कृत और हिंदी की विद्वान हैं। जाहिर है, इन दोनों भाषाओं में उनका ज्ञान अत्यंत समृद्ध होगा। लेकिन जब वे बच्चों के लिए कथाएं लिखती हैं तो उन्हें पता होता है कि बाल साहित्य लेखक की विद्वता का भौंडा प्रदर्शन नहीं, बल्कि परिपक्वता का दर्पण होना चाहिए।

एक अच्छे बालसाहित्यकार को यह पता होना चाहिए कि वह जिन पाठकों के लिए लिख रहा है, उन्हें क्या सीखना, समझना, जानना और पढ़ना चाहिए।

"निक्कू फेमस हो गया" कहानी के शीर्षक में लेखिका ने अंग्रेज़ी के "फेमस" शब्द का प्रयोग किया है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि वे इसके हिंदी शब्द से परिचित नहीं हैं। बल्कि वे जानती हैं कि साहित्य की ग्राह्यता के लिए उसका पाठकों से जुड़ाव भी ज़रूरी है। समय की नज़ाकत को देखते हुए इस कहानी में आप एक्टिविटी, पेटीएम और 50 आउट ऑफ 50 इन एवरी सब्जेक्ट जैसे अंग्रेजी शब्दों और वाक्यों को पढ़ सकते हैं। 

 उन्होंने दूब-सी नरम और लचीली, मगर मजबूत जड़ों वाली 11 बाल जीवनोपयोगी, रोचक कहानियाँ लिखकर बच्चों का साहित्य थोड़ा और समृद्ध कर दिया है।

इतना ही नहीं, पुस्तक के अंत में उन्होंने यह भी बताया है कि आखिर बच्चे कहानियाँ क्यों पढ़ें।

इस छोटे से सारगर्भित लेख से आज के भारी-भरकम स्कूल सिलेबस से दबे बच्चों और उनके माता-पिता को यह समझने में मदद मिलेगी कि कहानियाँ पढ़ना क्यों ज़रूरी है।

संग्रह की शीर्षक कथा "देखा एक सपना" एक प्यारी-सी बुलबुल और पेड़ के बीच का संवाद है। इस कहानी से बच्चे न सिर्फ विभिन्न मौसमों की जानकारी पाते हैं, बल्कि पक्षियों और पेड़ों की भावनाओं को भी समझ सकते हैं। ऐसी ताज़गी और मिठास से भरी कहानी पढ़े हुए बहुत समय हो गया था।

प्रस्तुत संग्रह में कहानियों के माध्यम से बच्चों को आसानी से बता दिया गया है कि उनके स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण के निकट और मोबाइल से दूर रहना कितना ज़रूरी है और क्यों ज़रूरी है।

सभी कहानियों का विवरण प्रस्तुत करने पर पढ़ने का मज़ा कम हो सकता है। मगर आपको सभी कहानियों के शीर्षक बता देते हैं, ताकि इस संग्रह की कहानियों के मिज़ाज का अनुमान लगाया जा सके।

संग्रह की बाकी 10 कहानियों के शीर्षक इस प्रकार हैं— "छगन का बाँका मुर्गा", "गिल्ली का अपना घर" (इस कहानी में गिल्ली एक गिलहरी है), "चिड़िया और हँसती कली", "बीनु का कुर्ता", "फूल वाली लड़की", "गाँव की गुनगुन", "गुमान और गौरैया", "अम्मा का वादा", "निक्कू फेमस हो गया" तथा "मुनमुन की सैर"।

यह पुस्तक हर बच्चे को ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता को भी अवश्य पढ़नी चाहिए।
पुस्तक : देखा एक सपना (बाल कहानी संग्रह)
लेखिका : कल्पना मनोरमा
प्रकाशक : अनन्य प्रकाशन, दिल्ली
कीमत : रुपये डेढ़ सौ मात्र

                        समीक्षक : शिखर चंद जैन

Comments

  1. आभार इसे प्रकाशित करने के लिए

    ReplyDelete
  2. सुंदर समीक्षा

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

कवि-कथानटी सुमन केशरी से कल्पना मनोरमा की बातचीत

माँ भाषण नहीं,भाषा दो

मैं पेड़ होना चाहती हूँ